AIIMS अस्पताल में चल रहे अनुसंधान से डायबिटीज का इलाज संभव?

क्या आप जानते है की आपके शारीर में मौजूद मूल कोशिकाएं (stem cell) आपके प्रारंभिक जीवन और विकास के दौरान शरीर में कई विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं में विकास करने की उल्लेखनीय क्षमता रखती है। इसका मतलब येह है की आपके शारीर की मांस-तंतु (tissue) को हुए किसी भी प्रकार के नुकसान की मरम्मत करने की यह क्षमता रखती है|

मधुमेह (डायबिटीज) होने की वजह दरहसल आपके शारीर की अग्न्याशय (Pancreas) में मौजूद बीटा कोशिका (beta cells) को हुए नुक्सान या उनके पूरी तरह नष्ट हो जाने की वजह से होते है| अगर किसी तरह से इनह कोशिकाओं को मूल कोशिका बना सके और इन्हे आपकी अग्न्याशय (पैंक्रियास) में दुबारह लगाया जा सके तोह येह वापस से इन्सुलिन बना सकती है जिससे आपकी ब्लड शुगर नियंत्रित रह सकती है|

इस बात में हमारी अधिक दिलचस्पी बढ़ता देख हमने दिल्ली में स्थित भारत सरकार के प्रसिध AIIMS हॉस्पिटल में चल रही स्टेम सेल (मूल कोशिका) की शोधकर्ता एवं प्रभारी प्राध्यापक डॉ.सुजाता मोहंती से संपर्क किया| डॉ. सुजाता मोहंती AIIMS अस्पताल की बहुत ही मशहूर शोधकर्ता है जिन्होंने अब तक 99 शोध पत्र प्रकाशित है (as on July 2017)| उनके द्वारा किये गए शोध भारत को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नई उचाई पर ले गए है|

डॉ. मोहंती ने हमे 23 मार्च 2016 को उनकी प्रयोगशाला में आने का निमंत्रण दिया जहां हमारी मुलाकात उनके साथ काम कर रही ३ मेधावी शोधकर्ताओं से हुई| हमारी उनसे हुई मुलाकात में बातो की सारांश कुछ इस प्रकार है:

1. मूल कोशिकाए (stem cell) हमारे शारीर में मौजूद बाकि सभी कोशिकाओं से बहुत अलग है, इसमें शारीर के ऊतक की मरम्मत करने की और इनमे मौजूद कोशिकाए बनाने की योग्यता होती है|

​2. मूल कोशिकाए क्योकि हमारे शारीर में मौजूद किसी भी हिस्से के ऊतक (Tissue) में होती है इसलिए AIIMS हॉस्पिटल के स्टेम कोशिका प्रयोगशाला में मौजूद हर शोधकर्ता किसी एक ऊतक पे काम कर रहा है|

3. शोधकर्ता अनुपमा, दिल के मांसपेशियों में मौजूद कोशिकाओं के उत्पादन के लिए बोन मैरो में से प्राप्त होने वाले mesenchymal स्टेम सेल्स पर अधयन कर रही है| शोधकर्ता मनीषा dopaminergic न्यूरॉन्स के उत्पादन और निस्र्पण (characterization) पर अधयन कर रही है जिससे की पार्किंसंस रोग के इलाज में बड़ी कामयाबी मिल सकती है|

वही शोधकर्ता सोनाली Mesenchymal stem cells (एम.इस.सी) के इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण (immunomodulatory properties) और इंसानी शारीर के अलग अलग मांसपेशियों सी प्राप्त होने वाले इन्ह Mesenchymal stem cells (एम.इस.सी) पर अधयन कर रही है और उनकी साथी शोधकर्ता सूचि इन्ह एम.इस.सी के पुनरुज्जीवित होने की क्षमता देख्ने के लिए इनका परिक्षण लिवर फाइब्रोसिस पर कर रही है|

 

4. मूल कोशिकाए (stem cell) अभी भारत में इन विट्रो, यानि इंसानी शारीर से बहार एक प्रयोगशाला में बनाई जाती है जिसमे की उन्ह कोशिकाओं के साथ बहुत ज़्यादा हेरफेर होती है और उससे जो परिणाम आते है वेह ज़रूरी नहीं की अगर किसी इंसानी शारीर में किये जाए तोह उसके परिणाम भी वही आएँगे|

5. हमे शोधकर्ताओं से येह भी बात पता चली की भारत में इंसानो पर स्टेम कोशिकाओं (Embryonic stem cells only are not allowed for clinical trials; only adult mesenchymal stem cells and hematopoietic stem cells are being used more frequently) का प्रयोग इंसानो पर करने की अनुमति नहीं होती और किसी चूहे पर प्रयोग करने के लिए भी बहुत बड़ी बैठके होती है क्योकि किसी भी ज़िंदा जीव पर प्रयोग करना बहुत जोखिम भरा काम होता है और ज़रूरी है की सोच समाज कर सही कदम उठाए जाए|

6. AIIMS हॉस्पिटल की स्टेम कोशिका की एक शोधकर्ताओं की टीम ने त्वचा रोग का भी इलाज स्टेम कोशिका से निकाला है|

7. अभी भले ही मूल कोशिकाओं पर अधयन डायबिटीज के इलाज के लिए AIIMS अस्पताल में नहीं हुआ है परन्तु आगे चलके कुछ क्लिनिकल परीक्षण इसके इलाज के लिए हो सकते है और AIIMS अस्पताल के शोधकर्ता इस अनुसंधान को लेकर बहुत ही सकारात्मक है|

AIIMS के प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं ने अभी तक अपने शोध में जितनी सफलताए हासिल की है उससे येह ज़ाहिर है की बहुत ही जल्द वेह भारत में डायबिटीज का इलाज खोज निकालेंगे|

डॉक्टर सुजाता मोहंती और उनके काम के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे|

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